Saturday, January 24, 2026

आइंस्टीन को चुनौती: वशिष्ठ नारायण सिंह की कहानी

डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह का जीवन असाधारण प्रतिभा और गहरे संघर्ष की एक ऐसी कहानी है, जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर नासा (NASA) तक पहुँचने वाले इस 'महान गणितज्ञ' का सफर कुछ इस प्रकार रहा:
1. प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म 2 अप्रैल 1946 को बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव में हुआ था। उनके पिता एक पुलिस कांस्टेबल थे।
 * विलक्षण प्रतिभा: बचपन से ही गणित में उनकी रुचि और पकड़ अविश्वसनीय थी।
 * पटना साइंस कॉलेज: कहा जाता है कि जब वे पटना साइंस कॉलेज में पढ़ते थे, तब वे अपने प्रोफेसरों को भी गणित के नए तरीकों से चौंका देते थे। उनके लिए यूनिवर्सिटी के नियमों को बदलते हुए उन्हें एक ही साल में बीएससी और एमएससी की परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी।
2. अमेरिका का सफर और नासा (NASA)
1960 के दशक में मशहूर गणितज्ञ जॉन केली की नजर उन पर पड़ी और वे उन्हें अपने साथ कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले (UC Berkeley) ले गए।
 * पीएचडी (PhD): 1969 में उन्होंने बर्कले से अपनी पीएचडी पूरी की।
 * नासा और शोध: इसके बाद उन्होंने नासा में काम किया और वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहे।
 * नासा की प्रसिद्ध कहानी: उनके बारे में सबसे मशहूर किस्सा '31 कंप्यूटरों' का है। कहा जाता है कि जब अपोलो मिशन के दौरान नासा के कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए थे, तब डॉ. सिंह ने खुद गणना (Calculation) शुरू कर दी। जब कंप्यूटर ठीक हुए, तो उनका और कंप्यूटर का परिणाम बिल्कुल एक जैसा था।
3. भारत वापसी और बीमारी का दौर
1970 के दशक की शुरुआत में वे भारत लौट आए। उन्होंने IIT कानपुर, TIFR और ISI कोलकाता जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया।
 * सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia): 1974 के आसपास उन्हें सिजोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी ने घेर लिया। 1976 में उनका तलाक हो गया और उनकी बीमारी बढ़ती गई।
 * गुमनामी के दिन: 1987 में वे अचानक एक ट्रेन यात्रा के दौरान गायब हो गए। करीब 4 साल तक वे लापता रहे और 1991 में वे बिहार के छपरा में काफी दयनीय स्थिति में मिले।
4. अंतिम समय और सम्मान
जीवन के आखिरी तीन दशक उन्होंने अपने परिवार के साथ और अस्पतालों में बिताए। बीमारी के बावजूद, वे कागजों पर गणित के समीकरण (Equations) लिखते रहते थे। 14 नवंबर 2019 को पटना में उनका निधन हो गया।
| पद्म श्री | 2020 | भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत उनके विज्ञान और शिक्षा में योगदान के लिए। |

Wednesday, December 31, 2025

2025: महीना-दर-महीना लेखा-जोखा


📅 2025: महीना-दर-महीना लेखा-जोखा (Hindi)
 * जनवरी: डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। भारत में प्रयागराज महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, लेकिन 29 जनवरी को भगदड़ की दुखद घटना हुई।
 * फरवरी: बजट में GST सुधारों की घोषणा हुई। मुंबई में काला घोड़ा महोत्सव की धूम रही और महिला क्रिकेट (WPL) का रोमांच शुरू हुआ।
 * मार्च: AI तकनीक ने पूरी दुनिया में रफ्तार पकड़ी। भारत में IPL का आगाज़ हुआ, जिससे क्रिकेट का बुखार चरम पर पहुँच गया।
 * अप्रैल: पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई।
 * मई: भारत ने जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया और आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसी महीने दुनिया को पोप लियो XIV के रूप में पहला अमेरिकी पोप मिला।
 * जून: अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान (AI 171) दुर्घटनाग्रस्त हुआ। अमेरिका में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ बड़े स्तर पर 'नो किंग्स' विरोध प्रदर्शन हुए।
 * जुलाई: भारत सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान तेज किया। खेल जगत में कर्स्टी कोवेंट्री IOC की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
 * अगस्त: भारत ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए आधिकारिक दावेदारी पेश की। बिहार के राजगीर में हॉकी एशिया कप का आयोजन हुआ।
 * सितंबर: दिल्ली में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप का सफल आयोजन हुआ, जहाँ दिव्यांग खिलाड़ियों ने अपना दम दिखाया।
 * अक्टूबर: दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों की दूसरी लहर चली। भारत में चुनावी सरगर्मियां तेज हुईं।
 * नवंबर: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया। दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके ने सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।
 * दिसंबर: साल का अंत जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के साथ हुआ। दुनिया ने 2025 के उतार-चढ़ाव को याद करते हुए 2026 का स्वागत किया।
📅 2025: महीना-दर-महीना डायरी (Bhojpuri)
 * जनवरी: डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनलन। प्रयागराज महाकुंभ में भारी भीड़ उमड़ल, बाकिर 29 जनवरी के भगदड़ से मन उदास हो गइल।
 * फरवरी: बजट में टैक्स के नया नियम आइल। मुंबई में काला घोड़ा मेला लागल अउर मेहरारू क्रिकेट (WPL) के खेल शुरू भइल।
 * मार्च: दुनिया भर में AI के चर्चा रहे। भारत में IPL के शोर मच गइल, हर गली-मोहल्ला में क्रिकेट के धूम रहल।
 * अप्रैल: पहलगाम में आतंकी हमला भइल जेकरा में 26 लोग मरल गइलन, पूरा देस में मातम छा गइल।
 * मई: भारत अपना ताकत देखवलस अउर 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत आतंकी अड्डन के तबाह कइलस। वेटिकन में पहिलका बेर कौनों अमेरिकी पोप (लियो XIV) चुनल गइलन।
 * जून: अहमदाबाद में एयर इंडिया के जहाज गिर गइल, जवन एगो बड़ दुर्घटना रहल। अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ लोग सड़क पर उतर गइलन।
 * जुलाई: सरकार नक्सली लोगन के खिलाफ कड़ा कदम उठवलस। खेल में नया इतिहास बनल जब IOC के पहिली महिला अध्यक्ष चुनल गइली।
 * अगस्त: भारत कहलस कि अब ऊ 2036 के ओलंपिक करावल चाहत बा। बिहार के राजगीर में हॉकी के बड़ मुकाबला भइल।
 * सितंबर: दिल्ली में पैरा एथलेटिक्स भइल, जहाँ खिलाड़ी लोग अपना हिम्मत से सबके दिल जीत लेहलन।
 * अक्टूबर: दुनिया भर में फेर से विरोध प्रदर्शन भइल। भारत में चुनाव के तैयारी जोर-शोर से शुरू भइल।
 * नवंबर: हमनी के महिला क्रिकेट टीम पहिलका बेर वर्ल्ड कप जीत के तिरंगा फहरा देहली। दिल्ली के लाल किला के पास धमाका से हड़कंप मच गइल।
 * दिसंबर: साल के विदाई जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप से भइल। लोग खट्टा-मीठा याद लेके 2026 के इंतजार करे लगलन।


Tuesday, December 30, 2025

धुरंधर: बॉक्स ऑफिस के "असली बाहुबली" (विश्लेषण)

प्रणाम! अगर रउआ अपने पॉडकास्ट (Podcast) में 'धुरंधर' (Dhurandhar) फिल्म के बारे में चर्चा करे के चाहतानी, त ई धाकड़ भोजपुरी रिव्यू रउआ बहुत काम आई।

सबके जोहार! आज हमनी बात करब आदित्य धर के निर्देशित फिल्म 'धुरंधर' के बारे में। ई फिल्म खाली एगो सिनेमा ना ह, बलुक एक्शन और देशभक्ति के एगो अईसन तूफान ह जवन बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा देले बा।"

​1. कहानी के दम (The Plot)

​फिल्म के कहानी 'ऑपरेशन लयारी' और भारत के जासूसी मिशन पर आधारित बा। जासूसी मिशन जवन कराची के अंडरवर्ल्ड और राजनीति के बीच में सेट बा। ई 1999 के विमान अपहरण (IC-814) और 26/11 नियर असली घटना के जोड़ के बनावल गइल बा। कहानी में एगो जासूस (रणवीर सिंह) बा जवन पाकिस्तान के भीतर घुस के आतंक के जड़ हिलावेला।

​2. कलाकारन के परफॉरमेंस (Acting & Cast)

  • रणवीर सिंह (Hamza/Jasikirat): रणवीर के ई अवतार देख के रउआ दंग रह जाइब। शांत, गंभीर और एकदम खूंखार! उनकर दाढ़ी वाला लुक और बिना 'स्लो-मोशन' वाला एंट्री बहुत जबरदस्त बा।
  • अक्षय खन्ना (Rehman Dakait): अक्षय खन्ना त पूरा महफिल लूट लेले बाड़न। उनकर 'विलन' वाला रूप और आँखों से डरावे के अंदाज रउआ के कुर्सी से हिलने ना दी।
  • संजय दत्त, आर. माधवन, और अर्जुन रामपाल: ई लोग अपने छोटे लेकिन दमदार रोल में फिल्म के जान बढ़ा देले बा।

​3. का खास बा? (The Good Stuff)

  • एक्शन: फिल्म के एक्शन एकदम 'रियलिस्टिक' (असली) लागेला। कोनो उड़े वाला सीन ना, बलुक खून-पसीना वाला असली लड़ाई देखल जाई।
  • निर्देशन (Aditya Dhar): 'उरी' बनावे वाला आदित्य धर फेर से साबित कइले बाड़न कि ऊ 'प्रोपेगेंडा' ना बलुक 'इम्पैक्ट' बनावे खातिर जानल जालें।
  • सिनेमेटोग्राफी: फिल्म के विजुअल्स और कराची के गलियों के बनावट एकदम असली लागेला।

​4. कहाँ कमी रह गइल? (The Cons)

  • फिल्म के लंबाई: फिल्म 3 घंटा 34 मिनट के बा, जवन कि बहुत जादे बा। कुछ जगह पर कहानी धीरे हो जाला और बोरियत महसूस हो सकेला।
  • रोमांस: सारा अर्जुन और रणवीर के बीच के लव एंगल थोड़ा जबरदस्ती के लागेला और फिल्म के रफ़्तार कम कर देला।

त कुल मिला के, 'धुरंधर' एगो अईसन फिल्म ह जवन रउआ के गर्व भी महसूस कराई और रोंगटा भी खड़ा कर दी। अगर रउआ के दमदार एक्टिंग और बिना कोनो फालतू मसाला वाला जासूसी थ्रिलर पसंद बा, त ई फिल्म मिस मत करीं। हमार रेटिंग होई: 4/5 स्टार।"

Monday, August 4, 2025

पहलगाम के आंसु

कैसा होगा वो मंजर जब एक 5 साल के बच्चे के सामने उसके बाप को गोली मार दिया गया।
कैसे रुकते होंगे उस नव-विवाहिता के आँसू जब उसके पति को केवल इसलिए मार दिया गया क्योंकि वो हिंदू है।
कहते हैं जब आपकी सच्चाई और गलत कारनामे आपके अपने लोगों को पता चलते हैं तो या तो आप सुधर जाते हो या वहशी हो जाते हो। यही हुआ पाकिस्तान और उसके समर्थकों का कश्मीर में।
वो तिलमिला गए क्योंकि कश्मीर उनकी बात नहीं सुन रहा है। कश्मीर के नौजवान बंदूक की जगह कलम उठा रहे हैं।
कश्मीर के लोग टूरिज्म से कमाई कर रहे हैं।
और फिर... कायरों ने पहलगाम के 26 निहत्थे लोगों को मार दिया।
पर कहानी तो उन्होंने शुरू की... अगले ब्लॉग में भारत की सेना खत्म करेगी।
जय hind 

सरकारी से प्राइवेट की यात्रा

 आज पाँच साल बाद सरकारी पब्लिक सेक्टर की याद आ रही है।

पूरे पाँच साल हो गए BEML छोड़े हुए। पहले चार साल तो मज़े की ज़िंदगी थी इसलिए याद नहीं आया, पर कहते हैं जब आपको ज़्यादा दुख मिले तो पुराना दुख सुख लगता है।

पब्लिक सेक्टर में लगभग 14 साल काम किया, अच्छा और बहुत सारा बुरा एक्सपीरियंस के साथ, जहाँ नो प्रमोशन, ह्यूमिलिएशन, लो पे-चेक, एंड ऑलवेज़ इन डेट।

प्राइवेट सेक्टर: 25% परसेंट करो, 100% दिखाओ, वो भी खूबसूरत ppt में। सरकारी नौकरी वाला ppt में हमेशा से कमज़ोर। पहले ही साल में बैड रेपो, बट फिर भी मैनेजर इज़ हैप्पी क्योंकि टेक्निकल आता था (गाली सिकायत देता भी कैसे, इंटरव्यू तो उसी ने लिया था), फाइनली बैक टू बैंगलोर (अभी बेंगलुरु नहीं हुआ था), एक मिक्स सी जर्नी ऑफ़ BTM का शुरू हुआ। फर्स्ट 3 इयर वेरी गुड, फॉरेन ट्रिप, हाई वॉल्यूम टेंडर्स, ऑल वॉज़ गोइंग गुड..... बट.....

द विलेन इन द पिक्चर, अ मोरक्कन लेडी विद हाई ईगो इज़ योर मैनेजर, एंड एवरीथिंग डिस्टर्ब्ड, ज़ीरो से सुपर ज़ीरो...कॉन्फिडेंस की माँ बहन...

बट बिहारी है ना, थेट्रोलॉजी में फ़र्स्ट...टिके रहे बेशर्म की तरह बिना अप्रेज़ल के (करते भी क्या, दूसरी नौकरी कहाँ थी)।

Aaj panch Saal baad  sarkari public sector ki yaad aa rahi hai..

Pure panch Saal ho gye BEML chore hue. Pahele char sal to maje ki jindgi thi is liye yaad nahi Aya, per kahte hai jab aapko jayeda dukh mile to Purana dukh sukh lagta hai..

Public sector me lag-bhag 14 Saal kam Kiya Accha aur bahut sara Bure experience ke sath jaha no promotion ,humiliation low paycheck and always in debt 

Private sector 25% percent karo 100% dikhayo wo bhi khubsurat ppt me. Sarkari naukari wala ppt me humesa se kamjor ,pahele hi Saal me bad repo but fir bhi Manager is happy kyoki technical aata tha ( Gali sikyat  deta bhi kaise interview to usi ne liya tha) ,finally back to Bangalore ( abhi Bengaluru nahi hua tha) ,ek mix si journey of BTM ka suru hua .first 3 year very good, foreign trip ,high volume tenders all was going good .....but.....

The villain in the picture ,A Moroccan  lady with high ego is your manager and everything disturbed ,zero se super zero ..confidence ki Maa bahen ...

But Bihari hai na thethrology me first..tike rahe besharam ki Tarah Bina appraisal ke ( karte bhi kya dusri naukri kaha thi) ......


Sarkari to private journey






"Today, after five years, I am reminded of the government public sector.
It has been a full five years since I left BEML. For the first four years, life was fun, so I didn't remember it, but they say that when you experience more sorrow, the old sorrow feels like happiness.
I worked in the public sector for about 14 years with good and many bad experiences, where there was no promotion, humiliation, low paycheck, and always in debt.
In the private sector, you do 25% and show 100%, that too in a beautiful PPT. The government employee was always weak in PPT, had a bad repo in the very first year, but still, the Manager was happy because he knew the technical aspects (how could he complain when he was the one who took the interview). Finally, back to Bangalore (it hadn't become Bengaluru yet), a mixed journey of BTM began. The first 3 years were very good, foreign trips, high-volume tenders, all was going good... but...
The villain in the picture, a Moroccan lady with a high ego is your manager and everything got disturbed, from zero to super zero... my confidence was shattered...
But being a Bihari, I am first in "thethrology" (a colloquial term for stubbornness or resilience).. I shamelessly stuck around without an appraisal (what else could I do, where was another job)...

Tuesday, March 24, 2020

उप्परवाले की वॉर्निंग

दुनिया में भगवान की अहमियत आज  इंसान को पता चल रहा हैं।  एक नहीं दिखने  वाले वायरस ने आदमी की औकात बता दी। सब लाचार है पंगु है आज
भगवान  बोले  रफ़्तार कम करो ,धरती पर रहम करो,पर हम कहा सुनते थे हमे तो पता नहीं कहा जाना था ,फुल एक्सेलेटर ,भगवन ने इमरजेंसी ब्रेक लगा के पार्किंग मोड में डाल दिया।

अब धरती के भगवान के सहारे हो ,जब तक वो ठीक स्वस्थ  रहे,पर हमारी आदत है न जो मिले उसे निचोड़ लो ,तो हम क्या कर रहे है डॉक्टर की सलाह घर में रहने की नहीं मान रहे है,स्कूल कॉलेज  ऑफिस सब बंद है पर फिर भी हमे बाहर जाना  हैं ,देखना है कौन बाहर आया है ,हमे  घूमना है ,क्यों क्योकि अभी डॉक्टर तो हैं न ,हमे तो अपने से मतलब है ,वो हमे ठीक कर दे भले वो ठीक न रहे।
सुधर जाओ नहीं तो हमेशा  के लिए पार्किंग मोड में चले जायोगे,

एक बात और कुछ लोगो को लगता हम पूजा कर रहे है नमाज़ पढ़ रहे ,भगवन को याद कर रहे है तो हमे कुछ नहीं होगा आराम से लोगो के गले मिलेंगे हाथ मिलएंगे भगवान तो है ही ,भाई लोग उप्परवाले  ने  भी अपना दरवाजा हम जाहिलो के लिए बंद कर दिया  ,मंदिर बंद मस्जिद बंद गुरुद्वारा बंद ,चर्च बंद ,अब क्या कहते हो शमशान  और कब्रिस्तान भी बंद हो जाये ,

सुधर जाओ... नहीं तो भगवान को सुधारना अच्छे से आता हैं।